रिश्ते
कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रह जाते हैं,
और कुछ इंतज़ार उम्र भर साथ निभाते हैं।
Shayari
कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रह जाते हैं,
और कुछ इंतज़ार उम्र भर साथ निभाते हैं।
रिश्ते धागों से नहीं, नर्मी से बंधे रहते हैं,
ज़रा सी सख़्ती और सब बिखर जाता है।