कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रह जाते हैं,
और कुछ इंतज़ार उम्र भर साथ निभाते हैं।
a moonlit literary journal
हर एहसास की एक दास्तान, हर दास्तान में एक इंतज़ार।
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कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रह जाते हैं,
और कुछ इंतज़ार उम्र भर साथ निभाते हैं।
हम उस दरवाज़े को अब भी खुला रखते हैं,
जिससे जाने वाले ने मुड़कर भी नहीं देखा।
मोहब्बत नाम है उस ख़ामोश दुआ का,
जो होंठों तक आए बिना क़ुबूल हो जाए।
जो कह न सके, वही सबसे गहरा था,
ख़ामोशी ने वो सब लिख दिया जो ज़ुबाँ से छूट गया।
दर्द भी अजीब मेहमान है साहब,
जाते-जाते घर का पता याद कर जाता है।
रात कितनी भी लम्बी हो, सहर आएगी,
तू बस दीया जलाए रखना, हवा थक जाएगी।
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कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रह जाते हैं,
और कुछ इंतज़ार उम्र भर साथ निभाते हैं।
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बस याद इतनी सी रह गई... कभी कोई अपना सा लगता था।