Shayari

शायरी

रिश्ते

कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रह जाते हैं,

और कुछ इंतज़ार उम्र भर साथ निभाते हैं।

इंतज़ार

हम उस दरवाज़े को अब भी खुला रखते हैं,

जिससे जाने वाले ने मुड़कर भी नहीं देखा।

मोहब्बत

मोहब्बत नाम है उस ख़ामोश दुआ का,

जो होंठों तक आए बिना क़ुबूल हो जाए।

ख़ामोशी

जो कह न सके, वही सबसे गहरा था,

ख़ामोशी ने वो सब लिख दिया जो ज़ुबाँ से छूट गया।

दर्द

दर्द भी अजीब मेहमान है साहब,

जाते-जाते घर का पता याद कर जाता है।

उम्मीद

रात कितनी भी लम्बी हो, सहर आएगी,

तू बस दीया जलाए रखना, हवा थक जाएगी।

तन्हाई

तन्हाई ने इतना सिखाया है मुझे,

अब भीड़ में भी अपने आप से बात कर लेता हूँ।

इंतज़ार

चाँद हर रात वक़्त पर आ जाता है,

काश कोई वादा भी इतना पाबंद होता।

मोहब्बत

तेरा ज़िक्र आते ही अल्फ़ाज़ नरम हो जाते हैं,

जैसे काग़ज़ पर पहली बारिश गिरी हो।

रिश्ते

रिश्ते धागों से नहीं, नर्मी से बंधे रहते हैं,

ज़रा सी सख़्ती और सब बिखर जाता है।

ख़ामोशी

उसने कुछ नहीं कहा और सब कुछ कह दिया,

आँखें बड़ी बेबाक ज़ुबान रखती हैं।

दर्द

टूटना भी एक हुनर है ऐ दोस्त,

हर टुकड़े में एक नई रौशनी उतरती है।

तन्हाई

रात के इस पहर सिर्फ़ दो जागते हैं,

एक चाँद और एक मेरा अधूरा ख़याल।

उम्मीद

मैंने हर बिछड़ने के बाद कुछ सीखा है,

उम्मीद रखना सबसे मुश्किल इबादत है।