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ज़िंदगी हर किसी को बार-बार मौका नहीं देती…
वक़्त के नाम एक नर्म सी नसीहत
ज़िंदगी हर किसी को बार-बार मौका नहीं देती,
कुछ दरवाज़े सिर्फ़ एक बार खुलते हैं —
और उस एक पल में
पूरी उम्र का फ़ैसला रखा होता है।
जिससे कहना है, आज कह दो।
जिसे थामना है, आज थाम लो।
मुड़कर देखने की आदत अच्छी है,
मगर सिर्फ़ मुड़कर देखते रहना — नहीं।
मैंने बहुत कुछ खोया है यूँ ही,
सोचते-सोचते, टालते-टालते।
अब मैं हर एहसास को उसी वक़्त जीता हूँ,
जिस वक़्त वो मेरे दरवाज़े पर आता है।
क्योंकि दास्तानें लिखी नहीं जातीं,
जी जाती हैं —
और इंतज़ार सिर्फ़ उनका होता है,
जिन्हें हमने जीने से पहले जाने दिया।