इंतज़ार-ए-दास्तान
Shayari
मोहब्बत नाम है उस ख़ामोश दुआ का,
जो होंठों तक आए बिना क़ुबूल हो जाए।
तेरा ज़िक्र आते ही अल्फ़ाज़ नरम हो जाते हैं,
जैसे काग़ज़ पर पहली बारिश गिरी हो।