Shayari

शायरी

दर्द

दर्द भी अजीब मेहमान है साहब,

जाते-जाते घर का पता याद कर जाता है।

दर्द

टूटना भी एक हुनर है ऐ दोस्त,

हर टुकड़े में एक नई रौशनी उतरती है।