इंतज़ार-ए-दास्तान
Shayari
तन्हाई ने इतना सिखाया है मुझे,
अब भीड़ में भी अपने आप से बात कर लेता हूँ।
रात के इस पहर सिर्फ़ दो जागते हैं,
एक चाँद और एक मेरा अधूरा ख़याल।