इंतज़ार-ए-दास्तान
Shayari
जो कह न सके, वही सबसे गहरा था,
ख़ामोशी ने वो सब लिख दिया जो ज़ुबाँ से छूट गया।
उसने कुछ नहीं कहा और सब कुछ कह दिया,
आँखें बड़ी बेबाक ज़ुबान रखती हैं।