इंतज़ार-ए-दास्तान
Shayari
हम उस दरवाज़े को अब भी खुला रखते हैं,
जिससे जाने वाले ने मुड़कर भी नहीं देखा।
चाँद हर रात वक़्त पर आ जाता है,
काश कोई वादा भी इतना पाबंद होता।