Shayari

शायरी

इंतज़ार

हम उस दरवाज़े को अब भी खुला रखते हैं,

जिससे जाने वाले ने मुड़कर भी नहीं देखा।

इंतज़ार

चाँद हर रात वक़्त पर आ जाता है,

काश कोई वादा भी इतना पाबंद होता।